Ralamandal Wildlife Sanctuary – रालामण्डल  अभयारण्य

रालामण्डल वन्यजीव अभ्यारण्य (Ralamandal wildlife sanctuary) इंदौर शहर की एक शानदार जगह है, जो चारों तरफ से जगलों से घिरी हुई है। इस अभ्यारण की सबसे खास बात यह है, कि यहां पर चारों तरफ घना जंगल है और एक ऊंची पहाड़ी है, जिसके ऊपर एक शिकारगाह बनी हुई है और शिकारगाह तक पहुंचाने के लिए, आपको ट्रैकिंग करनी पड़ती है, जो बहुत ही मजेदार रहती है।

अगर आप इंदौर शहर आ रहे हैं, तो आपके यहां पर आकर इस जगह की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद जरूर लेना चाहिए।

रालामंडल अभ्यारण का इतिहास

रालामंडल अभ्यारण्य (Ralamandal Sanctuary) इंदौर शहर से 12 किलोमीटर की दूरी पर  स्थित है। इस अभ्यारण्य का क्षेत्रफल 262 वर्ग फीट है। इस अभ्यारण्य की स्थापना होलकर महाराज के समय की गई थी। यह उनके मनोरंजन की एक प्रमुख जगह थी। अभ्यारण्य में पहाडी पर एक इमारत का निर्माण 1905 में कराया गया था। यह इमारत बहुत खूबसूरत है।

इस इमारत का उपयोग शिकार कैंप के रूप में किया जाता था। इस पहाडी की उचाई समुद्र तल से 782 मीटर है। रालामंडल पहाड़ी वर्ष 1954 में आरक्षित घोषित किया गया तथा वर्ष 1979 में इस अभ्यारण्य को वन्य प्राणी अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuary) घोषित किया गया।

अक्टूबर 1998 अभ्यारण्य में शाकाहारी वन्य प्राणियों को भोपाल के चिडियाघर से लाकर इस अभ्यारण्य में छोड़ा गया। अभ्यारण्य में करीब 62 प्रकार के पक्षी भी वर्ष भर आते रहते है। यह जानकारी यह पर लिखित है। जिससे आपको इस अभ्यारण्य के बारे में जानकारी मिल जाती है।

आप रालामंडल अभ्यारण्य (Ralamandal Sanctuary) साल में कभी भी आ सकते हैं। मगर रालामंडल अभ्यारण्य (Ralamandal Sanctuary) में आने का सबसे अच्छा समय मानसून का माना जाता है। मानसून के सीजन में यहां पर चारों तरफ हरियाली होती है। यादि आप ट्रैकिंग करना चाहते है, तो यह आपके लिए एक बेस्ट जगह है।

एकमात्र सबसे छोटा अभ्यारण – रालामण्डल वन्यजीव अभ्यारण्य

आप अगर इंदौर शहर में जंगल जैसा परिदृश्य देखना चाहते है, तो यहां पर आकर आप जंगल का वातावरण महसूस कर सकते है और यह की खूबसूरत वदियों का लुप्त उठाते है।

रालामंडल अभ्यारण्य (Ralamandal Sanctuary) आकर आप यहां पर ट्रैकिंग का मजा ले सकते हैं। यहां ट्रेकिंग के लिए दो रास्ते हैं। एक रास्ता पक्का है और एक रास्ता कच्चा है, जो जंगल से होता हुआ जाता है और पक्का रास्ता 5 किलोमीटर का है और एक रास्ता ढाई किलोमीटर का है।

आप यहां पर कच्चे रास्ते से ट्रैकिंग कर सकते हैं और ट्रैकिंग में आपको बहुत मजा आएगा। आप ट्रैकिंग में यहां पर आते हैं, तो आपको शूज पहनकर आने चाहिए, ताकि आपको चलने में आसानी हो। यदि आप यहां पर जंगली जानवरों की प्रजातियों को देखना चाहते हैं तो यहां न आए, क्योंकि देखने के लिए ज्यादा जीव यहां पर नहीं हैं।

रालामंडल अभ्यारण्य (Ralamandal Sanctuary) में डियर पार्क बनाया गया है। यहां पर पर्यटक को लुभाने के लिए डियर पार्क बनाया गया है। डियर पार्क में आप सफारी का मजा ले सकते है। सफारी के लिए बैटरी से चलने वाली आटो का उपयोग किया जाता है, जिससे यहां पर शोर नहीं होता है, जिससे जंगली जानवर अपनी जिंदगी सुकून से जी सकते है।

बैटरी आटो के उपयोग से किसी भी प्रकार का प्रदूषण नहीं फैलाता है।  बैटरी आटो में चार से पांच लोग बैठा सकते है। लोगों को इस पूरी सफारी में घुमाया जाता है। अभ्यारण्य में आपको बहुत सारे जंगली जानवर जैसे हिरन, नीलगाय, खरगोश आदि  देखने मिलते है। यहां पर जाने का चार्ज आतिरिक्त होता है।

अगर आपको ट्रैकिंग पंसद हैं, तो आपको यहाँ अवश्य आना चाहिए। यहां पर ट्रैकिंग करके पहाडी के उपर पहुॅचाते है तो आपको यहां पर प्राचीन इमारत शिकारगाह देखने मिलती है जो होलकर राजाओं द्वारा बनवाई गई थी। पहाड़ी की चोटी से आपको इंदौर शहर का बहुत ही खूबसूरत व्यू देखने मिलता है। आपको  ट्रैकिंग करके आने के फलस्वरूप यहां खूबसूरत नजारा देखकर आपकी थकान गुम हो जाती है।

रालामंडल अभ्यारण्य (Ralamandal Sanctuary) पर आप की एंट्री का भी चार्ज लिया जाता है, जो बहुत कम रहता है। आप यहां पर जाते है तो अपने साथ आईडी कार्ड जरूर लेकर जाए। बिना आईडी कार्ड के प्रवेश वर्जित है। यहां पर आपकी गाड़ी पार्किंग चार्ज भी लिया जाता है। उसके बाद आप यहां पर ट्रैकिंग के लिए जा सकते हैं।

यहां पर किसी भी तरह की दुकान नहीं मिलेगी। केवल पहाडी के शीर्ष पर एक दुकान लगती है, इसलिए आप यह पर जाए तो अपने साथ कुछ खाने का और पानी भी जरूर लेकर जाए।  अभ्यारण्य में विशेषकर मानसून के दौरान के दौरान बहुत भीड होती है।

अगर आप गर्मी के मौसम मे यहां पर आते है, तो यह पर ट्रैकिंग के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा होगा। यह फोटोग्राफी लिए सबसे अच्छी जगह एक बहुत ही बढिया जगह है। परिवार और दोस्तों के समूहों के साथ यहां पर घूमने आना बहुत ही मजेदार होगा। यहां पर प्लास्टिक वर्जित है। अभ्यारण्य सुबह 7ः00 बजे से शाम 5ः00 बजे तक खुला रहता है।

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