श्री काल भैरव मंदिर भारत के मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित एक हिंदू मंदिर है। काल भैरव मंदिर (Kal Bhairav Mandir) अपनी एक विशेष तरह की परंपराओं के लिए पूरे भारत देश में प्रसिद्ध है।
यहां पर भगवान काल भैरव को मंदिरा चढ़ाने की परंपरा सालों से चली आ रही है और भगवान काल भैरव जी मंदिरा का सेवन भी करते हैं। इस परंपरा को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु इस मंदिर में घूमने के लिए आते हैं।
उज्जैन के काल भैरव मंदिर की जानकारी (Kal Bhairav Mandir Ujjain)
काल भैरव मंदिर उज्जैन शहर में भारत के कुछ प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह मंदिर शिप्रा नदी के तट पर स्थित है। यह यात्रा करने के लिए एक बढ़िया जगह है। यह एक सिद्ध मंदिर है।
श्री काल भैरव मंदिर उज्जैन शहर से लगभग आठ किलोमीटर की दूर स्थित होगा। श्री काल भैरव का यह मंदिर बहुत प्राचीन है। यह मंदिर बहुत प्राचीन और चमत्कारिक है।कालभैरव का यह मंदिर लगभग 6,000 साल पुराना है।
परंपरा के अनुसार, श्रद्धालु श्री काल भैरव मंदिर में प्रसाद के रूप में केवल शराब ही चढ़ाते हैं। आश्चर्यजनक बात यह है कि काल भैरव की मूर्ति में किसी प्रकार का छेद नहीं है फिर भी भैरव की यह प्रतिमा मदिरापान करती है। जब शराब का प्याला काल भैरव की प्रतिमा के मुख से लगाया जाता है, तो वह एक पल भर में खाली हो जाता है।
इसकी वैज्ञानिक जांच भी हुई कि आखिर ये मदिरा कहां जाती है, लेकिन कुछ नहीं पता चल सका। मदिरा पिलाने की यह प्रथा भी काफी पुरानी हो चुकी है।
श्री काल भैरव मंदिर, जो राजा भद्रसेन द्वारा 9 वीं शताब्दी के आसपास बनाया गया था। श्री काल भैरव को उज्जैन शहर का संरक्षक माना जाता है। इस मंदिर में रोजाना हजारों भक्त आते हैं। शराब मंदिर में चढाए जाने वाले विशेष प्रसादों में से एक है।
मंदिर के बाहर आपको नारियल, फूल और शराब की एक बोतल सहित प्रसाद के टोकरियाँ बेचने वाले बहुत सारे दुकान वाले देखने मिल जाते है। जहां से आप काल भैरव जी को प्रसाद चढाने के लिए खरीद सकते है। यहां पहुॅचने वाले भक्त पुजारी को शराब की बोतल देते है।
पुजारी शराब को प्याले में डालता है, फिर वह प्रार्थना करता है और काल भैरव के पास प्याला लेकर जाता है। वह प्याले को थोड़ा सा झुकाता है और आप को अब चमत्कार देखने मिलेगा। आप देखेगें कि शराब गायब होने लगती है। उसके बाद बोतल का थोडा सा शराब का हिस्सा भक्त को प्रसाद के रूप में वापस कर दिया जाता है।
स्कंद पुराण में श्री कालभैरव मंदिर का अवंतिका खंड में वर्णन मिलता है। यह क्षेत्र भैरवगढ़ कहलाता है। राजा भद्रसेन द्वारा इस मंदिर का निर्माण कराया गया था। उसके बाद राजा जयसिंह ने इसका जीर्णोद्धार करवाया। इस मंदिर के प्रांगण में स्थित एक संकरी और गहरी गुफा में पाताल भैरवी का मंदिर है। यह स्थान तांत्रिक साधना का एक महत्वपूर्ण स्थल है।
काल भैरव मंदिर में शिवरात्रि और नागपंचमी पऱ लाखों की तादाद में लोग आते है। यहां पर ज्यादा भीड होने पर लोगों को मंहगे गहने पहनने से बचना चहिए और अपने सामान की देखभाल स्वयं करना चहिए। यहां पर भस्म आरती देखने लायक होती है। आप महाकाल मंदिर के दर्शन के बाद श्री काल भैरव के दर्शन कर सकते है।
आप इस मंदिर में अपनी दोस्तों और परिवार के लोगों के साथ आ सकते है। यहां पर आपको बहुत शांती मिलती है।