भारत में अनेकों रहस्यमई मंदिर है, इन मंदिरों में उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर (Nagchandreshwar Mandir) भी एक है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है, कि यह साल में एक बार खुलता है। इस मंदिर के बारे में बहुत सी धारणाए है, जो आज के लेख में आपको पता चलने वाली हैं।
उज्जैन का रहस्यमई मंदिर नागचंद्रेश्वर मंदिर (Nagchandreshwar Mandir)
भारत देश में नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है और विशेषकर हिंदू धर्म के लोगों में यह परंपरा मनाई जाती है। नाग पंचमी के दिन लोग नाग देवता को पूजा करते हैं और उन्हें दूध पिलाते हैं।
उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर (Nagchandreshwar Mandir) एक रहस्यमई मंदिर है, जो महाकाल की नगरी उज्जैन में स्थित है। नागचंद्रेश्वर मंदिर (Nagchandreshwar Mandir) महाकालेश्वर मंदिर के परिसर में तीसरी मंजिल पर स्थित है।
इस मंदिर की खासियत यह है कि यह मंदिर साल में सिर्फ एक दिन नागपंचमी पर ही भक्तों के दर्शनों के लिए खोला जाता है। लोगों की यह धारणा है कि इस दिन नागराज तक्षक स्वयं मंदिर में रहते हैं।
आप ने सर्प शय्या पर विष्णु भगवान जी को विराजमान देखा होगा। मगर इस मंदिर में आपको एक अनोखी प्रतिमा देखने मिलती है। इसमें सर्प शय्या के आसन पर शिव-पार्वती विराजमान हैं। कहा जाता हैं कि यह प्रतिमा नेपाल से लाई गई थी। उज्जैन के इस मंदिर के अलावा दुनिया में कहीं भी आपको ऐसी प्रतिमा देखने नहीं मिलेगी।
इस मंदिर का मुख्य आकर्षण यह मूर्ति है जो अपने आप में एकमात्र है, जो पूरी दुनिया में एकमात्र मूर्ति है जिसमें भगवान विष्णु के स्थान पर भगवान भोलेनाथ सर्प शय्या पर विराजमान हैं। यहां पर भगवान शिव पार्वती और गणेश के साथ शेषनाग की प्रतिमाए है। यहां 11वीं शताब्दी की एक अद्भुत प्रतिमा है।
उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर (Nagchandreshwar Mandir) साल में एक बार 24 घंटे के लिए खुला रहता है और ऐसा माना जाता है कि साॅपों के राजा तक्षक यहाँ रहते है और वह नांगपंचमी के दिन ही बाहर आते है, और अपने भक्तों को दर्शन देते है।
मंदिर में हर साल श्रावण महीने में शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन खुलता है, जिसे नाग पंचमी के रूप में जाना जाता है। लोगों का मानना है कि अगर किसी की कुंडली में काल सर्प दोष है, तो इस मंदिर में आने से वहां दोष दूर हो जाता है।
उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर (Nagchandreshwar Mandir) नागपंचमी पर मध्यरात्रि 12ः00 बजे खुलता है और आरती के बाद 12ः30 बजे सार्वजनिक रूप से दर्शन के लिए खोला दिया जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन नाग भगवान यहां मौजूद रहते हैं।
भगवान शिव की एक अनोखी झलक पाने के लिए मंदिर में लाखों की भीड़ उमड पडती है। मंदिर अगले आधी रात को पुन आरती होती है और मंदिर के द्वार को बंद कर देते है। जनता के लिए 11ः30 बजे ही बंद कर दिये जाते है।
नागचंद्रेश्वर मंदिर का इतिहास
मंदिर के बारे में यह कथा प्रचलित है कि सांपों के राजा तक्षक ने भोलेनाथ की घोर तपस्या की थी। तपस्या से भोलेनाथ प्रसन्न हुए और उन्होंने सर्पों के राजा तक्षक नाग को अमर होने का वरदान दिया।
मान्यता है कि उसके बाद से राजा तक्षक ने प्रभु की भक्ति में लीन हो गए। सर्पराज तक्षक की यही इच्छा थी कि उनके एकांत में कोई विघ्न ना डाले। इसलिए वर्षो से यही प्रथा चल रही है, साल में सिर्फ 1 दिन ही नागपंचमी के दिन ही वे भक्तों को दर्शन देते है। बाकी समय मंदिर बंद रहता है। इस मंदिर में दर्शन करने के बाद व्यक्ति किसी भी तरह के सर्पदोष से मुक्त हो जाता है, इसलिए नागपंचमी के दिन इस मंदिर में बहुत भीड रहती है।
उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर (Nagchandreshwar Mandir) को लेकर सबकी अलग-अलग धारणाएं है। इस मंदिर में नाग पंचमी के दिन लाखों की संख्या में लोग आते हैं। लाखों की संख्या में लोग लाइन लगाकर खड़े रहते हैं और अपनी बारी का इतंजार करते है। भगवान भोलेनाथ जिसको भी दर्शन होते हैं। वह अपने आप को बहुत ही भाग्यशाली समझता है। कहा जाता है कि यहां पर सर्प दोष दूर होता है, इसलिए यहां पर और ज्यादा भीड लगती है। माना जाता है कि यह पर सभी इच्छाएं भी पूरी होती है, इसलिए यहां पर लोगों की भीड लगी रहती है।