रानी दुर्गावती समाधि स्थल जबलपुर – Holy Rani Durgavati Samadhi Jabalpur

रानी दुर्गावती समाधि (Rani Durgavati Samadhi) स्थल जबलपुर जिले का एक दर्शनीय स्थल है। यह जबलपुर जिले का गौरव है, की जबलपुर की भूमि रानी दुर्गावती की जबलपुर कर्मभूमि है। रानी दुर्गावती ने जबलपुर एवं आसपास के क्षेत्र की बागडोर अपने हाथ में संभाली थी और उन्होंने अपने क्षेत्र के लिए बड़े-बड़े लड़ाइयां लड़ी थी। रानी दुर्गावती की मृत्यु इसी जगह पर हुई थी। इसलिए यहां पर उनका समाधि स्थल बनाया गया है। यह स्थल बरगी रोड में स्थित है। आप यहां पर घूमने के लिए आ सकते हैं।

रानी दुर्गावती समाधि स्थल की जानकारी – Information about Rani Durgavati Samadhi Sthal

रानी दुर्गावती का समाधि स्थल (Rani Durgavati Samadhi) जबलपुर जिले में स्थित एक मुख्य पर्यटन स्थल है। रानी दुर्गावती ने अपनी आखिरी सांस यहीं पर ली थी। रानी दुर्गावती एक महान वीरांगना थी। वह एक गोंड़ रानी थी, उन्होंने लड़ते-लड़ते वीरगति प्राप्त की थी।

उन्होंने अपनी आखरी सांस तक लड़ा था। अपने राज्य को बचाने के लिए उन्होंने मुगलों से मुकाबला किया था। मगर वह इस मुकाबले में शहीद हो गई। रानी दुर्गावती की समाधि जबलपुर (Rani Durgavati’s tomb Jabalpur) में बनाई गई है और यहां पर आप घूमने के लिए जा सकते हैं।

रानी दुर्गावती समाधि स्थल (Rani Durgavati Samadhi sthal) चारों तरफ से बाउंड्री से कवर किया गया है। यहां पर गेट भी लगा हुआ है। यहां पर ज्यादातर टाइम में गेट बंद रहता है। आप अंदर नहीं जा सकते हैं। यहां पर रानी दुर्गावती की समाधि (Rani Durgavati Samadhi ) आपको देखने के लिए मिलती है और यहां पर मंदिर भी बना हुआ है, जहां पर लोग रानी दुर्गावती की पूजा करते हैं। यहां पर बाजू में स्कूल भी बना हुआ है।

यह इलाका जो है, वह गांव वाला है। यहां पर सभी तरह की सुविधाएं मौजूद है। यहां पर होटल बना हुआ है, जहां पर आप चाय या नाश्ता कर सकते हैं। यहां रानी दुर्गावती समाधि (Rani Durgavati Samadhi) के सामने एक बड़ा सा मैदान है।

मैदान के आगे छोटा सा पुल बना हुआ है और यहीं पर रानी दुर्गावती के बेटे की मूर्ति बनी हुई है। रानी दुर्गावती की बेटे की मूर्ति के पास ही में आपको घना जंगल देखने के लिए मिल जाता है और यहां पर ग्रामीण लोगों के देवता का एक छोटा सा मंदिर पर बना हुआ है।

रानी दुर्गावती समाधि स्थल (Rani Durgavati Samadhi sthal) बरसात में बहुत ही सुंदर लगती है। यहां पर बरसात में जब पानी गिरता है, तो चारों तरफ हरियाली हो जाती है। यहां पर साल के घने वृक्ष भी लगे हुए हैं, जो सुंदर लगते हैं और पहाड़ी भी है, जिसका दृश्य अच्छा लगता है। बरसात के समय यहां पर पानी बहता है, जो सुंदर लगता है। आपको यहां पर आकर मजा आएगा।

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रानी दुर्गावती का मेला या समाधि का मेला – Fair of Rani Durgavati or Samadhi Fair

रानी दुर्गावती का मेला या समाधि का मेला के नाम से प्रसिद्ध यह मेला रानी दुर्गावती समाधि स्थल (Rani Durgavati Samadhi) में लगता है। यह मेला बहुत प्राचीन है और दशकों से यहां पर लगते हुए आया है। यह मेला रानी दुर्गावती समाधि स्थल (Rani Durgavati Samadhi) के सामने, जो बड़ा सा ग्राउंड बना हुआ है। वहां पर लगता है। वहां पर बहुत सारे दूर-दूर से गांव वाले लोग आते हैं।

इस मेले में घूमने के लिए जबलपुर एवं अन्य जिलों से भी लोग आते हैं। इस मेले में बहुत सारे झूले, दुकान एवं शो वगैरा देखने के लिए मिल जाते हैं। आप यहां पर मैजिक शो, डांस शो सभी चीजों का मजा ले सकते हैं। इस मेले में पार्किंग की सुविधा भी रहती है, जहां पर आप अपनी गाड़ी खड़ी कर सकते हैं और मेले का आनंद उठा सकते हैं।

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रानी दुर्गावती का जीवन परिचय – Biography of Rani Durgavati

रानी दुर्गावती का जन्म कलिंजर में चंदेल शासक कीर्ति सिंह के यहां हुआ था। ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि दुर्ग में जन्म होने अथवा दुर्गा के नाम पर उसका नाम दुर्गावती रखा गया था। दुर्गावती का विवाह गोंड शासक संग्राम सिंह के बड़े पुत्र दलपति शाह के साथ सन 1542 में हुआ था। सन 1545 को दुर्गावती ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम वीरनारायण रखा गया। कुछ ही वर्ष पश्चात 1550 में पति दलपति शाह की मृत्यु हो गई और रानी ने स्वयं शासन की बागडोर अपने हाथों में ले लिया।

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रानी दुर्गावती की मृत्यु कैसे हुई – How did queen durgavati died

अकबर की साम्राज्य विस्तार नीति के कारण उनका मानिकपुर का सूबेदार अब्दुल मजीद आसिफ खा ने 50000 प्रशिक्षित सैनिकों के साथ नरई नाले के समीप रानी दुर्गावती पर आक्रमण किया। रानी ने अपने अप्रशिक्षित सैनिकों के साथ उसका मुंह तोड़ जवाब देते हुए, उन्हें पीछे ढकेल दिया।

दूसरे दिन आसिफ खा ने तोप खाने सहित आक्रमण किया। युद्धरत रानी के गर्दन पर तीर लगे जाने पर, स्वयं को असुरक्षित पाने की अवस्था में उन्होंने इस स्थान पर अपने कटार से आत्मसात कर 24 जून 1564 को अपनी जान ले ली और अमर हो गई। उनके शौर्य, महानता, त्याग, बलिदान आदि गुणों को ध्यान रखने हेतु इस स्थल पर प्रत्येक वर्ष 24 जून को रानी दुर्गावती को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।

 

रानी दुर्गावती की समाधि कहां पर है – Where is the tomb of queen durgavati

रानी दुर्गावती की समाधि (Rani Durgavati Samadhi) जबलपुर जिले की एक प्रसिद्ध जगह है। यह समाधि स्थल बरगी जाने वाली सड़क में स्थित है। आप गौर से बरगी जाते हैं, तो आपको यह समाधि स्थल देखने के लिए मिल जाता है। यह समाधि स्थल नरई नाले के पास में स्थित है। आप यहां पर अपनी गाड़ी से कार से आराम से जा सकते हैं।

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