हरसिद्धि माता मंदिर सागर – Holy Harsiddhi Mandir Sagar

हरसिद्धि माता मंदिर (Harsiddhi Mandir Madhya pradesh) मध्य प्रदेश का एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर प्राचीन है। यह मंदिर हरसिद्धि माता को समर्पित है। यह मंदिर मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित है।  इस मंदिर में नवरात्रि के समय बहुत सारे लोग दर्शन करने लिए आते हैं। यह मंदिर प्राकृतिक परिवेश से घिरा हुआ है। यहां पर आकर अच्छा लगता है। अगर आप सागर आते हैं, तो आपको इस मंदिर में जरूर घूमने के लिए आना चाहिए।

हरसिद्धि माता मंदिर रानगिर, रहली, सागर मध्य प्रदेश – Harsiddhi Mandir Rangir Rahli, Sagar Madhya Pradesh

हरसिद्धि माता का मंदिर पूरे मध्यप्रदेश (Harsiddhi Mandir Madhya pradesh) में प्रसिद्ध है। रानगिर हरसिद्धि माता का मंदिर (Rangir Harsiddhi Mandir) सागर जिले का एक धार्मिक पर्यटन स्थल है। यह मंदिर सागर जिले के रहली तहसील में स्थित है। यह रहली तहसील से करीब 20 किलोमीटर दूर है। माता हरसिद्धि का मंदिर रानगिर नाम की जगह पर है। रानगिर बहुत सुंदर जगह है। यहां पर प्राकृतिक दृश्य देखने के लिए मिलता है। यहां पर पहाड़, नदी, जंगल देखने के लिए मिलता है और इन सभी के बीच में माता का मंदिर विराजमान है।

रानगिर पर बूढ़ी रानगिर और नवनिर्मित दोनों ही मंदिर बने हुए हैं। यहां देहर नदी बहती है। देहर नदी के पूर्वी तट पर माता हरसिद्धि का मंदिर विराजमान है। नदी के उस तरफ जंगल में बूढ़ी रानगिर का मंदिर देखने के लिए मिलता है।  माता का प्राचीन स्थल, बूढ़ी रानगिर है।

सबसे पहले माता बूढ़ी रानगिर में ही विराजमान थी। मगर बाद में, माता को देहर नदी के पूर्वी तट की तरफ विराजमान कर दिया गया और मंदिर नए तरीके से बनाया गया। यहां पर, जो भी लोग आते हैं। वह बूढ़ी रानगिर मंदिर में जरूर घूमने के लिए जाते हैं। यहां पर बूढ़ी रानगिर मंदिर जाने के लिए नदी को पार करना पड़ता है और पहाड़ी को चढ़ना पड़ता है और जंगल वाला रास्ता है। पूरा रास्ता कच्चा है।

बड़ी-बड़ी चट्टानें और जंगल वाला रास्ता है। मगर इसमें बहुत मजा आता है। लोग यहां पर ट्रैकिंग करते हैं। यहां जंगल और नदी का खूबसूरत दृश्य देखने के लिए मिलता है। यह करीब 1 या डेढ़ किलोमीटर का रास्ता रहता है। यहां पर बहुत सारे बंदर भी हैं। अगर आपके पास खाने पीने का सामान हो, तो उसको संभाल के रखने की जरूरत रहती है, नहीं तो बंदर आपसे छीन झपट के सामान लेकर जाएंगे।

आप बूढ़ी रानगिर में पहुंचते हैं, तो आपको प्रसाद की बहुत सारी दुकान देखने के लिए मिलती है, आप प्रसाद ले सकते हैं। बूढ़ी रानगिर को चढ़ाने के लिए, उसके बाद आप मंदिर जाएंगे, तो मंदिर ज्यादा बड़ा नहीं है। छोटा सा ही मंदिर है और मंदिर के अंदर बूढ़ी रानगिर की प्रतिमा के दर्शन करने के लिए मिलते हैं। यहां पर आपको पंडित जी भी मिल जाते हैं। मंदिर के पीछे की तरफ आपको प्राचीन अवशेष देखने के लिए मिलेंगे, जो यहां पर बंजारे रहते थे। यहां पर उनके अवशेष देखने के लिए मिलते हैं।

रानगिर हरसिद्धि मंदिर (Harsiddhi Mandir) पर मुख्य तौर पर नवरात्रि में बहुत ज्यादा भीड़ लगती है। बहुत सारे भक्त नवरात्रि में माता के दर्शन करने के लिए आते हैं। यहां नवरात्रि में दिन-रात लोग आते हैं और माता के दर्शन कर सकते हैं। यहां पर अपने वाहन से पहुंचा जा सकता है। नवरात्रि के समय यहां पर प्राइवेट बसें चलती हैं। यहां पर जबलपुर, सागर, नरसिंहपुर, गौरमझार, रहली  इन सभी जगह से प्राइवेट बसें चलती हैं, जिनके द्वारा आप मंदिर तक आसानी से पहुंच सकते हैं और दर्शन कर सकते हैं।

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रानगिर मां हरसिद्धि मंदिर का इतिहास – Rangir Harsiddhi mandir ka itihaas

मां हरसिद्धि मंदिर (Harsiddhi Mandir) को लेकर बहुत सारी मान्यताएं हैं, कहा जाता है, कि यहां पर प्राचीन समय में घना जंगल हुआ करता था। यहां पर एक चरवाहा था, जिसकी छोटी बच्ची के साथ,  एक वनकन्या खेला करती थी। उसके साथ खाना खाया करती थी और शाम के समय उसे एक चांदी का सिक्का दिया करती थी।

एक बार चरवाहे ने चुपके से उस वनकन्या को देखा। जब माता को पता चला, तो वह वनकन्या पाषाण का रूप लेकर यही विराजित हो गई। उसके बाद चरवाहे ने यहां पर चबूतरा बनाया और मां की आराधना की। इस प्रकार हरसिद्धि माता यहां पर विराजमान हुई।

मां हरसिद्धि मंदिर के बारे में, की माता हरसिद्धि का मंदिर किसने बनाया। इसके बारे में वैसे कोई जानकारी नहीं है। मगर प्राचीन समय में यहां पर राजा महाराजाओं का शासन हुआ करता था, जिनके द्वारा यह मंदिर बनाया हुआ माना जाता है।

रानगिर हरसिद्धि मंदिर (Rangir Harsiddhi Mandir) की पौराणिक कथा इस प्रकार है, कि यह मंदिर एक प्रमुख शक्तिपीठ है और जब सती माता आग में कूद गई थी। तब शिव भगवान जी माता सती के शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे और भगवान विष्णु ने माता सती के शरीर को अपने चक्र से काट दिया था। माता के शरीर के अंग जहां गिरे।

वहां शक्तिपीठ का निर्माण हुआ। इस जगह पर माता सती की रागे गिरी थी, जिसे जांग भी कहते हैं। इसलिए इस जगह को रानगिर के नाम से जाना जाता है और यह एक प्रमुख शक्तिपीठ है। यहां पर दर्शन करने के लिए बहुत दूर दूर से लोग आते हैं।

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यहां पर माता अपना रूप बदलती है

रानगिर हरसिद्धि माता मंदिर (Harsiddhi Mandir) में माता अपना रूप बदलती है। यह चमत्कार है और इसे बहुत सारे लोग ने देखा है। कहा जाता है, कि यहां पर माता सुबह के समय बाल्यावस्था में देखने के लिए मिलती है। दोपहर के समय युवावस्था में और शाम के समय बूढ़ी माता के रूप में दर्शन देती हैं और माता के इस चमत्कार को बहुत सारे लोगों ने देखा है।

हरसिद्धि माता का मंदिर नवनिर्मित है। माता के गर्भ गृह में माता का विग्रह देखने के लिए मिलता है। माता का विग्रह बहुत सुंदर है। माता वस्त्र और आभूषणों से सुसज्जित है। माता के ऊपर फूल मालाएं चढ़ी हुई है। यहां पर मंदिर के बाहर बहुत सारे प्रसाद की दुकान है, जहां से माता को अर्पित करने के लिए प्रसाद लिया जा सकता है। यहां पर सभी प्रकार की व्यवस्थाएं उपलब्ध है। माता के दर्शन करके शांति मिलती है।

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रानगिर हरसिद्धि मंदिर कहां पर स्थित है – Where is Rangir Harsiddhi Mandir located

रानगिर हरसिद्धि माता मंदिर (Harsiddhi Mandir) सागर जिले का प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर पूरे मध्य प्रदेश में प्रसिद्ध है। इस मंदिर में सभी जगह से लोग घूमने के लिए आते हैं। रानगिर हरसिद्धि मंदिर सागर जिले में रहली तहसील के पास रानगिर में स्थित है। यह मंदिर घने जंगल में बना हुआ है। इस मंदिर में पहुंचने के लिए पक्का रास्ता बना हुआ है।

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रानगिर हरसिद्धि मंदिर कैसे पहुंचा जा सकता है – How to reach Rangir Harsiddhi Mandir

रानगिर हरसिद्धि मंदिर (Harsiddhi Mandir) में आप आसानी से आ सकते हैं। इस मंदिर में सागर नरसिंहपुर नेशनल हाईवे पर सुरखी के आगे से सड़क मार्ग मिलता है, जहां पर 10 किलोमीटर करीब अंदर जाना पड़ता है और दूसरा मार्ग सागर जबलपुर हाईवे सड़क से होते हुए जाता है।

आपको रहली के पास एक रास्ता देखने के लिए मिलता है। आपको मुख्य सड़क मार्ग में ही रानगिर जाने के लिए बोर्ड मिल जाता है, जहां से आप रानगिर जा सकते हैं और माता रानी के दरबार पहुंच सकते हैं। यहां पर आप अपने वाहन से पहुंच सकते हैं। यहां पर आपको पार्किंग की व्यवस्था मिलती है। नवरात्रि में यहां पर प्राइवेट बस वगैरह चलती है, जिससे आप पब्लिक ट्रांसपोर्ट से भी यहां पर पहुंच सकते हैं।

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